ट्रम्प प्रशासन ने सऊदी अरब के निरंकुश क्राउन प्रिंस पर अंकुश लगाने के लिए यह बयान दिया कि यमन युद्ध एक महीने के भीतर बंद होना चाहिए मगर ट्रम्प सरकार ने यह बातें तब शुरू कीं जब देख लिया कि यमन युद्ध में सऊदी अरब को बुरी तरह विफलता हाथ लगी है। इस युद्ध से यमन में मानव त्रासदी उत्पन्न हो गई मगर यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने अपनी रक्षा शक्ति में लगतार विस्तार किया।
ट्रम्प प्रशासन ने यमन युद्ध रोकने की मांग की मगर सऊदी अरब ने इमारात के साथ मिलकर यमन की अलहुदैदा बंदरगाह पर हमला तेज़ कर दिया जबकि इसी बंदरगाह से यमन के लिए खाने पीने की चीज़ें और दवाएं भेजी जाती हैं। यमन की 28 मिलियन की जनसंख्या में आधी आबादी भुखमरी की कगार पर पहुंच चुकी है।
हुदैदा पर इससे पहले भी सऊदी गठबंधन ने हमला किया था लेकिन बाद में उसे यह हमला रोकना पड़ा क्योंकि हमले का कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा था। अब सऊदी गठबंधन ने एक बार फिर बमबारी शुरू कर दी है और संभावित रूप से इस हमले के लिए वह अमरीका से मिलने वाले हथियारों को प्रयोग कर रहा है।
गत शुक्रवार को पेंटागोन ने सऊदी युद्धक विमानों को हवा में रिफ़्यूलिंग कराने की प्रक्रिया रोकने का एलान किया मगर इससे भी यमन पर सऊदी अरब के हमलों में कोई कमी नहीं आई। इस समय हुदैदा की सड़कों पर लड़ाई हो रही है।
मुहम्मद बिन सलमान ने वर्ष 2015 में रक्षा मंत्रालय संभालने के कुछ ही दिन बाद यमन युद्ध छेड़ दिया था वह समझ रहे थे कि कुछ ही दिनों में यह युद्ध जीत लेंगे और अंसारुल्लाह आंदोलन को राजधानी यमन से बाहर निकाल कर अपनी मर्ज़ी की कोई सरकार यमन पर थोप देंगे मगर अब यमन एक दलदल बन चुका है जहां 16 हज़ार से अधिक आम नागरिक मारे जा चुके हैं, यमन के अस्पताल, बाज़ार, मस्जिदें सब ध्वस्त हो गए हैं।
इस बड़े पैमाने पर रक्तपात कर लेने के बाद भी सऊदी क्राउन प्रिंस को यमन में कोई कामयाबी नहीं मिल सकी। इसके बाद भी उनकी आपराधिक कार्यवाहियां जारी रहीं और फिर उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या भी करवा दी।
रविवार को अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने मुहम्मद बिन सलमान से कहा कि यमन में हमले बंद करें मगर इसके साथ ही पोम्पेयो यह संकेत भी दे रहे हैं कि मुहम्मद बिन सलमान जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या में लिप्त तत्वों को सज़ा देंगे हालांकि इस हत्या के प्रमुख अभियुक्त तो खुद मुहम्मद बिन सलमान हैं।
ट्रम्प प्रशासन यह कहता है कि वह यमन में युद्ध रुकवाने और शांति वार्ता शुरू करवाने के संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों का समर्थन करता है मगर यह बात साफ़ है कि युद्ध रुकवाने और दसियों लाख लोगों को बचाने का एक ही रास्ता है कि अमरीका सऊदी अरब की आर्थिक मदद रोक दे। यह ज़रूरी है कि सऊदी अरब और इमारात को कोई हथियार न बेचा जाए और उनके साथ किसी भी प्रकार का इंटैलीजेन्स और लोजिस्टिक सहयोग न किया जाए।